मुर्गासन की सही विधि से करें अनेको रोगों की चिकित्सा,जाने कैसे,,, बता रहें हैं,महायोगी स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी,,,

मुर्गासन की सही विधि से करें अनेको रोगों की चिकित्सा,जाने कैसे,,,

बता रहें हैं,महायोगी स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी,,,

मुर्गासन का अर्थ है,मुर्गे जैसी मुद्रा में स्थित रहना,,
जबकि वास्तविक मुर्गा इस प्रकार का कोई आसन या मुद्रा नहीं करता है,जैसे अन्य पक्षियों की आकृति है,ठीक वैसी ही मुर्गे की आकृति है,वो भी दो पैरों पर चलता हुआ,चुग्गा चुगता है और मांसाहारी मनुष्यों का अधिकतर भोजन बनता है।तब क्या लाभ उसकी सी आकृति धारण करने की?खुद सोचो?
खहीं ओर तो कोई रहस्य नहीं इसके पीछे?
मनुष्य जब इस कथित मुद्रा को बनाता है,तब क्या होता है,उसको इस मुर्गासन करने में प्राप्त?
तो देखे की,ये विषय योगियों का अपने प्राणों को विभिन्न मुद्राओं द्धारा शरीर के शक्तिबिन्दुओं को दबा कर चेतन्य करना रहा है,यो बस इन्होंने इतनी सारी लगभग 84 आसनों का एक क्रम बनाया और शरीर की विभिन्न नाड़ियों पर क्या ओर कहां प्रभाव पड़ता है,ये जानने का प्रयास किया,जबकि सीधा सा योग मार्ग में किसी सहज मुद्रा में अत्यधिक देर तक बैठकर अपने मन को शरीर के किसी अंग में केंद्रित करते हुए उसी में लीन हो जाना मुख्य विषय रहा है,जो इन सब योगासनों की मुद्राओं में अत्याधिक देर नहीं स्थिर हुआ जा सकता है।तब ये एक स्वास्थ्यवर्द्धक व्यायाम बन गए,बस।
जिन्हें विशेषकर नटों ने बहुत उच्चे स्तर पर विकसित कर लोगो को हैरत में डालकर धन कमाया।
जबकि मुर्गासन में मुर्ग का अर्थ है-म्रत्यु ओर आसन मतलब उसपर विजय प्राप्त करना यो मुर्गासन का अर्थ हुआ कि ऐसी अवस्था जो मृत्युंजय बना दे यानी म्रत्यु को जीता जा सके।

मुर्गा आसन करने की प्रचलित विधि:-

अपने योग मेट को या दरी को बिछा ले ओर अपने दोनों पैरों को थोड़ा सा फैलाकर सीधे खड़े हो जाए और आगे की ओर झुकते हुए अपने सिर को घुटनों तक मोड़े।
अब दोनों घुटनो के पीछे से अंदर से अपने दोनों हाथों को डाल कर अपने उस दोनों हाथों से अपने दोनों कानों को पकड़े।
इस अवस्था में आने के बाद अपने नितंबों को धीरे धीरे ऊपर की ओर उठाये ओर अब इसी अवस्था मे टिके या बने रहें।
इस अवस्था में 10 से 15 सेकंड तक बने रहे।
ओर सांस की स्थिति सामान्य रहनी चाहिए,न गहरे सांस ले और ना ही कुम्भक करना है।अब इस अभ्यास की समाप्ति पर धीरे-धीरे से पहले अपने हाथों से कान की पकड़ छोड़े ओर फिर अपने पैरों से निकाल कर सीधे खड़े जाए ओर धीरे से एक गहरा सांस लेकर धीरे से छोडे ये हुआ एक बार का मुर्गा आसन करना।
ओर ध्यान रहे ये मुर्गा आसन केवल एक बार ही करना है,बस आगे चलकर अपना समय बढ़ाना है।तभी शरीर की स्ट्रेंथ ओर स्टेमिना बढ़ेगी और रोग दूर होंगे।
गलत मुर्गासन:-
ओर मुर्गासन में पैरों पर पकड़ बनाकर बैठ जाना मुर्गासन का बिगड़ा रूप है,बस कुछ देर विश्राम को होता है,अन्यथा पीठ और पैरों को ऊपर की ओर खींचते हुए इस मुद्रा में बने रहना ही सही मुर्गासन कहलाता है।

मुर्गा आसन करने के लाभ जाने:-

मुर्गा आसन करने में आगे की ओर झुकने से आंखों की मांसपेशियों को बड़ा अच्छा लाभ पहुंचता है।रोशनी बढ़ती है,भेंगापन खत्म होता है।
मुर्गा आसन करने से पीठ के मांसपेशियां में खिंचाव से पीठ का दर्द खत्म होता और पीठ शक्तिशाली बनती है,रीढ़ की हड्डी के दोष खत्म होते है।नितंब पर जमा अतिरिक्त फैट्स घटता है।नितंब सुंदर बनते है।पेट की दूषित वायु दोष समाप्त होता है।
दिमाग की ओर रक्त दबाब से मष्तिष्क की थकान मिटाने से दिमाग तेज और सोचने की क्षमता बढ़कर शांत रहता है।
मुर्गा आसन करने से करने से साधक यानी अभ्यासी के चेहरे में रक्त का प्रवाह से चेहरे के तेज में वृद्धि ओर चहरे की झुर्रियां नहीं पड़ती या बहुत कम होती है। साथ ही माइग्रेशन के दर्द में फायदा मिलता है।
बालों के झड़ने की समस्या भी घटती है।

विशेष योगज्ञान:-मुर्गासन करने में जब दोनों हाथ की कलाईयां जांघों ओर पिंडलियों के बीच से घुटने के नीचे से गुजरती है,ओर कान के लटकन को पकड़ते है,तब कलाई के मध्य के शक्तिबिन्दु ओर पिंडली के शक्तिबिन्दुओं पर दबाब पड़ने से रोग दूर होते है।ओर कान के शक्ति पॉइंट दबाने से कान में स्थित सम्पूर्ण शरीर के रोगों का उपचार होता है।

मुर्गा आसन को करते में क्या सावधानियां बरते:-

जो लोग रीढ़ की हड्डी की किसी गहरी समस्या से परेशान है या हृदय रोगी है और हाइ ब्ल्डप्रेशर से है,उन्हें मुर्गा आसन नहीं करना चाहिए। ओर गर्भवती महिलाएं तो इस आसन को बिल्कुल ना करें। साथ ही यदि आपको मुर्गासन करते में चक्कर आने की समस्या हो तो ये आसन को जबतक चक्कर का होना बंद हो तब तक इसे करना बंद कर दें।
मुर्गासन को 1 मिंट से अधिक बिलकुल नहीं करें।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
महायोगी स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
Www.satyasmeemission.org

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