.पफ़स्सि सिद्धमहायोगमुद्रा,जिसे पूरे शरीर की हर मांसपेशियों के तनाव दूर होने के साथ पेट के हर से मुक्ति डायबीटिक, पीलिया,आंतों की सूजन,नाभि का हटना,सभी स्त्री और पुरुष जनेन्द्रिय सम्बन्धित गुप्त रोगों से,काम भाव की नीरसता से मुक्ति,ओर सरसता की प्राप्ति,ब्रह्मचर्य का उच्चतर विकास होना और विशेषकर पैरों के अंगूठे से लेकर मूलाधार चक्र तक 9 शक्ति बिंदु जाग्रति ओर स्वाधिष्ठान,नाभि चक्र,ह्रदय चक्र,कंठ चक्र ओर आज्ञा चक्र में होकर सहस्त्रार चक्र में प्रवेश की प्राप्ति होगी,,

.पफ़स्सि सिद्धमहायोगमुद्रा,जिसे पूरे शरीर की हर मांसपेशियों के तनाव दूर होने के साथ पेट के हर से मुक्ति डायबीटिक, पीलिया,आंतों की सूजन,नाभि का हटना,सभी स्त्री और पुरुष जनेन्द्रिय सम्बन्धित गुप्त रोगों से,काम भाव की नीरसता से मुक्ति,ओर सरसता की प्राप्ति,ब्रह्मचर्य का उच्चतर विकास होना और विशेषकर पैरों के अंगूठे से लेकर मूलाधार चक्र तक 9 शक्ति बिंदु जाग्रति ओर स्वाधिष्ठान,नाभि चक्र,ह्रदय चक्र,कंठ चक्र ओर आज्ञा चक्र में होकर सहस्त्रार चक्र में प्रवेश की प्राप्ति होगी,,

बता रहें हैं,अपने सारे योग जीवन के प्रयोगों के साथ साथ सत्यास्मि मिशन के अनगिनत योग भक्तों पर किये गए योग अनुसंधान का सर्वश्रेष्ठ परिणाम,महायोगी स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी,,

प्राचीनकाल से ही योग जगत के गुप्त अभ्यासी सिद्ध योगियों ने अपने योग उपयोग में इस रेहि क्रियायोग के उच्चतर योगाभ्यास में यह सभी प्रकार से सिद्धि देना वाला सिद्धमहायोगमुद्रा अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है इससे इसका नाम सिद्धमहायोगमुद्रा रखा गया है । इसमे मुख्यता इस स्थितियों की उपयोगिता मुख्य है-सिद्धासन,पद्धमासन ओर अर्द्धपद्धमासन ओर सांस व प्रश्वास में रेचक, कुम्भक और पूरक।मूलबंध लगाना ओर छोड़ना।

कैसे करे,इसे सिद्धमहायोगमुद्रा को विधिवत:-

सबसे पहले अपने सीधे हाथ पर अपने चलते स्वर की जांच कर ले,अब जो स्वर चल रहा है,उसी साइड के पैर को ऊपर चढ़ाते हुए,आप सिद्धासन या पद्मासन या अर्धपद्मासन लगाकर सीधे बैठ जाये,अब इन मे कोई एक आसन को लगाकर,अपने दोनों हाथों को आकाश की ओर सिर से ऊपर कानों की साइड से ऊपर सीधे उठाएं,हथेली खुली रहेंगे,अब आप गहरा सांस के मूलबंध लगाये,ओर अपने दोनों हाथों को अपनी पीठ के पीछे ले जाकर के, चल रहे स्वर की साइड के हाथ से जैसे की मानो,आपका बायां स्वर चल रहा है,तो अपने बायें हाथ से दाहिने हाथ की कलाई पकडें।दोनों हाथ की मुट्ठियां बन्द रहे,अब दोनों हाथों को खींचकर कमर तथा रीढ के मिलन स्थान पर ले जायें।अब एक गहरी सांस लेकर अपना मूलबंध लगाएं और अब अपने शरीर को आगे झुकाकर भूमि पर टेक दें,ओर अपने दोनों एक से दूसरे पकड़े हाथों को ऐसे ही अपनी पीठ के ऊपर की ओर ज्यादा से ज्यादा सीधे ही रखते हुए,खींचते रहें और
अब यहाँ तीन प्रकार से आगे झुक कर ये अभ्यास किया जाता है,की-
1-सामने को झुककर पृथ्वी से अपना माथा लगाये ओर इसी स्थिति में रहते हुए,अपनी सांस को धीरे से बाहर निकालते हुए मूलबंध को छोड़ दे और कुछ क्षण यहीं रुककर फिर एक गहरा सांस भरे ओर मूलबंध टाईट करते हुए लगाकर धीर से ऊपर को सीधा बैठते जाएं,ओर साथ ही अपने दोनों हाथों की परस्पर पकड़ को छोड़कर अपने सामने को लाते हुए फिर से सिर से ऊपर लेकर सीधा कर मुठियाँ खोलकर अंगुलियों को आकाश की ओर सीधा कर रखें,इस सबके साथ मे अपना सांस को धीरे से छोड़कर यानी रेचक करते में, अपना मूलबंध को ढिलाकर छोड़ दें।ये हुए पहली सिद्धमहायोगमुद्रा का एक अभ्यास।


अब दूसरी महायोग मुद्रा के अभ्यास में भी,ठीक यही सब करोगे,बस जिस ओर का सांस का स्वर चल रहा था,उसके विपरीत दिशा के अपने घुटने पर अपना सिर झुक कर मूलबंध लगाते हुए लगाएं, वही कुछ क्षण रुके ओर फिर से ताजा गहरा सांस भरकर मूलबंध लगाकर ऊपर को सीधा बैठ जाये और अपने दोनों हाथों की पकड़ सहित मुट्ठियों को खोलते हुए अपने सामने को लाते हुए सिर से ऊपर को ले जाकर मुट्ठियों को खोलकर उनलियों को आकाश की ओर करे दे,ओर अब दोनों हाथों को वापस नीचे लाकर के, सहज मुद्रा में बैठ जाएं।ठीक ऐसे ही,यही सब, अब आप दूसरी साइड से इसी प्रकार सभी बताये अभ्यास के साथ करें।
इसे आप तीनो अवस्थाओं के अभ्यास को, केवल एक एक बार करते हुए केवल तीन बार ही करेंगे।ये तो हुए एक स्वर वाली साइड के तीन अभ्यास।
ओर अब ठीक ऐसा ही आप दूसरे स्वर वाली साइड से भी यही सब तीनों प्रकार की महायोगमुद्राओ का अभ्यास केवल तीन बार ही करेंगे।
यो छः बार करके अभ्यास समाप्त हो जाएगा।

सिद्धमहायोगमुद्रा से समस्त लाभ:-

ऐसा कोई लाभ नही जो इस महायोगमुद्रा के सरल अभ्यास से नहीं प्राप्त होगा।सब लाभ प्राप्त होंगे।
सामान्यतौर पर तो,आपके पेट के सभी पाचनतन्त्र के अंगों-नाभि लाइव,आंतों आदि की अवस्था मे किसी भी ऐंठन से आये रोग को ठीक करने के लिए, यह महायोगमुद्रा आसन करते हों तो,प्रारम्भ में केवल पाँच-दस सेकण्ड तक ही करें।
कमर और पीठ के सभी खिंचाव ठीक होना व डिस्क समस्या का ठीक होना तथा कंधे ओर गर्दन कि स्पोंडलाइटिस,गले के टोंसिल, भारी आवाज व खरखराहट ठीक होगी।पसलियों ओर ह्रदय के आसपास की सभी मांसपेशियां बलिष्ठ बनती है ओर
आध्यात्मिक लाभ का शरीर यानी अन्नमय कोष और प्राण शक्ति को सभी ओर सुचारू रूप से चलाकर प्राणमय कोष में प्रवेश कराकर प्राणायाम जगत में चर्मोउत्कर्ष लाभ देता है।इस महायोग मुद्रा के निरंतर अभ्यास से,मनुष्य शरीर मे जो 16 शक्ति पॉइंट है,उनमे प्राण ओर मन का संयोग बढ़कर मूलाधार चक्र,स्वाधिष्ठान चक्र,नाभिचक्र,ह्र्दयचक्र, कंठ चक्र तक के सभी पंचतत्वों का शोधन करते हुए,आज्ञाचक्र में मन का प्रवेश तक का समस्त मार्ग सुलभ करता है।
यो इसे रेहीक्रियायोग सिद्धयोगमुद्रा
को करें और खुद देखें-स्वास्थ से लेकर आत्मिक के परम लाभ।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
महायोगी स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
Www.satyasmeemision.org

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Scroll to Top