हकीक या अकीक रत्न क्या है,व कहां पाया जाता है और इसके क्या लाभ ओर हानि ओर सरल टेस्टिंग विधि व विशेष उपाय,, बता रहे है,स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी,,

हकीक या अकीक रत्न क्या है,व कहां पाया जाता है और इसके क्या लाभ ओर हानि ओर सरल टेस्टिंग विधि व विशेष उपाय,,
बता रहे है,स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी,,

कुछ भक्तो के हकीक रत्न के क्या लाभ हानि है और कैसे पाएं इन्हें पहनकर,अशुभ ग्रहों से पूरा फायदा,,तो उन्हीं भक्तों के ज्ञान लाभ के लिए, ये हकीक पत्थरों पर लेख है,वैसे रेहि क्रियायोग ओर गुरु मंत्र के निरंतर जप से सभी लाभ बिन किसी हानि के पाए जाते है।फिर भी जो हकीक के फायदे जाना चाहते है,तो,,

हकीक को हिंदी में अकीक और अंग्रेजी में अगेट के नाम से जाना जाता है। इसकी खोज को लेकर अनेक कहानियां है,की इसे नदियों से मछुवारों के गले मे पड़े इन विचित्र पत्थरो के आकर्षण को देख कर व्यापारियों ने इसे अपने व्यवसाय से जोड़कर प्रसिद्ध किया,लगभग 400 साल पहले तो,किसी के अनुसार इसे ग्रीक दार्शनिकों ने इस रत्न को 300 ईसा पूर्व खोजा था।वैसे हकीक पत्थर से बना ये रत्न, सभी मुख्य रत्नों का उप-उप रत्न विकल्प होता है। इसे ज्यादातर लोग पहनने की फैशन की माला,मंत्रों को सिद्ध करने के लिए जप माला या ग्रहों के शुभ परिणाम पाने को हाथ की अलग अलग उंगलियों में अंगूठी के रूप में पहनते है। हकीक को ज्योतिषी की सलाह के मुताबिक बताए गए रंग के अनुसार कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है।

हकीक पत्थर भारत मे कहाँ अधिक पाया जाता है:-

हकीक पत्थर,जबलपुर के निकट भेडा घाट से आगे पश्चिम दिशा की तरफ नर्मदा नदी की सम्पूर्ण तलहटी में ये बिखरा यानी बहुत ज्यादा संख्या में मिलता है। औंकारेश्वर के निकट, नर्मदा नदी में विशेष रूप से और ये विभिन्न आकार ओर प्रकार के हकीक रत्न के रूप में प्राप्त होते हैं। प्रसिद्ध नर्मदेश्वर शिवलिंग इसी पत्थर से हो वहां की जल धारा में अपने आप ही बनते रहते हैं ऐसी उस क्षेत्र के लोगो की मान्यता है।

हकीक नर्मदा नदी में अधिकतर स्लेटी, पीले, चितकबरे और अनेक मिश्रित रंगों वाले हकीक का अकीक रत्न प्राप्त होते हैं। वैसे,लाल रंग का हकीक रत्न पत्थर ईरान एवं यूनान आदि देशों में अधिक मात्रा में पैदा ओर पाया जाता है। ये हकीक अलग अलग देश व क्षेत्रो के स्थलों के वातावरणा के अनुसार हकीक स्टोन विभिन्न रत्न की जातियों सहित अनेक विचित्र रूपों में मिलता है। किन्तु रासायनिक विश्लेषण से जांचने पर इसमें केवल बहुत जरा सा ही अन्तर मिलता है।अधिकतर समस्त जगहां पर उपलब्ध अकीक या हकीक रत्न स्टोन एक सामान ही होते हैं।बस इनमे आपसी अन्तर का मुख्य आधार इनका अलग अलग रंग ही होता है। इसी प्रकार के रंग भेद को ध्यान में रखते हुए अकीक स्टोन को मुख्यतौर पर दस वर्गों में बाँटा जाता है।पर प्रभाव सभी रंग के हकीकों का राशिगत ही मुख्य होता है।

हकीक रत्न के रंग:-

हकीक अधिकतर मुख्य रूप से 6 रंगों में पाया जाता है- हकीक वैसे तो ओर भी मिश्रित होकर कई रंगों के पाए जाते हैं जैसे काले, दूधिया सफेद, ग्रे, नीले, हरे, गुलाबी व भूरे के साथ ही ब्लू बैंडेड, बैंडेड, ब्लू लेस, बोत्सवाना, बुल आई, कैथेड्रल, कोलोरिन, क्रैकेल्ड फायर, क्रेजी लेस, डेन्ड्रिटिक, फायर, फायर-बर्न, जिओड, होली ब्लू, लगुन, लूना और मौस अगेट आदि रंगों के प्रकार के हकीक पाए जाते हैं।पर अधिकतर हकीक काला, सफेद, पीला, लाल, हरा एवं नीला व मटमैला ही खासकर प्रचलन में है। इन सभी हकीकों का ज्योतिषीय महत्व बहुत अलग-अलग होता है।

सबसे बढ़िया हकीक:-

जिस हकीक में सफेद रंग की धारीदार पट्टियां पाई जाती हैं उसे सभी हकीकों मे सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

1-काला हकीक राहु ग्रह के लिए पहना जाता है,इससे अचानक होने वाले कष्ट,परेशानियां,विध्न बाँधाओं में शांति व मानसिक संतुलन और तनाव के लिए पहनना चाहिए।
2-सफेद हकीक चंद्रमा ग्रह के लिए है,जल या दवाइयों का चलते रहना,फूड पोइजन होना,घर की स्त्री,बेटी, मां का बीमार रहना,पेट ली आंतों में सूजन या फेफड़ों में रोग,व प्रेम की सफलता व आध्यात्मिक शांति और वैराग्य के लिए पहनना शुभ है।
3-पीला हकीक गुरु ग्रह के दोष निवारण,विवाह में,सन्तान में,नोकरी में,पीलिया या डायबटीज,गुर्दे से पीलिया रोग निवारण को व निर्भीकता, धन और सुख समृद्धि के लिए पहना जाता है।
4-नीला हकीक शनिदेव के प्रकोपों से बचने के लिए,मुकदमों ने विजय,अच्छी नींद और बहुत प्रेत भरे,बुरे सपने से बचने के लिए होता है।
5-धूसर रंग का हकीक,केतु ग्रह की शांति को है,बुखार बना रहे,खांसी बनी रहे,पैरों में कमजोरी रहे,गुप्तांग में कोई भी कष्ट कमजोरी हो,गुप्त जादू व गुप्त शत्रु,गुप्त अफवाह से बचाव को ये पहना जाता है।
6-लाल हकीक-मंगल ग्रह की शांति को पहना जाता है,क्रोध,विवाद,कलह,तेज बुखार,झगड़े होने,सेना,पुलिस में भर्ती में विध्न,मांगलिक दोष निवारण,ब्लडप्रेशर को,रक्त दोष को पहना जाता है।
7-हरा हकीक-बुध ग्रह की शांति व लाभ को पहना जाता है,व्यापार में हानि,एकाउंट के काम,वाणी दोष,स्मरण शक्ति की कमी,धन की कम बचत,योजनाओं में लाभ हो,प्रेम की प्राप्ति को,त्वचा के रोगों में शांति को,ज्योतिष में लाभ को,भाषण में सफलता को,मित्रता में व्रद्धि हो,को पहनना शुभ है।
8-चमकीला रक्तमी लाल हकीक-सूर्यग्रह की शांति को पहना जाता है,नोकरी में प्रमोशन,इंटरव्यू में सफलता,पुत्र प्राप्ति,मन विचारों की दृढ़ता व शुद्धि को,पिता व बड़े भाई,बड़े बेटे व बेटी को कष्ट न रहे,त्वचा में जलन रहे,खून कम बने,डिप्रेशन न रहे,प्रोग्रेस होती रहे को पहना जाता है।
9-आसमानी हकीक-शुक्र ग्रह के दोष निवारण को पहना जाता है,वीर्य या रज मे शुक्राणुओ की कमी,प्रसिद्धि में कमी,प्रेम व भोगों में असफलता न मिले,स्वस्थ रहे,खूबसूरती बढ़े,स्किन पर चमक आये,ध्यान साधना व मन्त्र साधना में सफ़लता मिले, फिल्मी करियर में सफलता,फैशन डिजानिग मे सफ़लता को पहना जाता है।

हकीक रत्न के ओर भी लाभ :-

1-मान्यता हैं की,सफेद या पीली या आसमानी रंग के हकीक की माला का जप करने से अपने इष्टदेव इष्टदेवी प्रसन्न हो जाते हैं।
2-मान्यता है कि,रंगीन हकीक को धारण करने से सभी तरह की विध्न, बाधाएं दूर हो जाती हैं।
3-काले धूसर रंग के हकीक माला पहनने से शनि, राहु एवं केतु के दोष दूर हो जाते हैं।
4-माना जाता है कि सफेद या पीले या आसमानी या कुछ हरे रंग के हकीक को घर की मेज या पढ़ने की टेबिल की दराज में या अपने पर्स में या तकिए के नीचे रखने से सौभाग्य की वृद्धि होती है,मन चित शांत रहता है।
5-मान्यता हैं कि, जिसके पास असली हकीक होता है,उसकी सभी प्रकार की दरिद्रता का नाश हो कर बहुत उन्नति पाता है।
6-अपने जन्म अंक के ग्रह के रंग अनुसार हकीक की माला से जप करने से अपने किसी भी इष्ट या गुरु मंत्र का जप किया जाए, तो यह बहुत ही जल्द चमत्कारी फलदायी लाभ प्राप्त होता है।

हकीक रत्न की हानि:-

हकीक पत्थर या रत्न को अपने पास पर्स या तकिए के नीचे या पूजाघर में रखने या गले या कलाई में जड़वाकर या हाथ में अंगूठियों के रूप में पहने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से पूछ कर पहनना अधिक शुभ रहता है,वैसे ही पहनने से ये उल्टा नुकसान दे सकता है। हकीक का अलग अलग प्रकार से नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है, यदि आपने बिन पूछे या जाने,हकीक को कम या ज्यादा रत्ती में लेकर पहन या रख लिया तो, हो सकता है कि ये आपको नुकसान दे दे,वैसे बहुत से रत्न विशेषज्ञ मानते हैं कि हकीक रत्न को धारण करने के लिए कैरेट माप का यानी रत्ती के नियम का कोई पालन नहीं किया जाता है।
फिर भी किसी भी रत्न, मणि या पत्थर को धारण करने के पहले कुंडली का अध्ययन करना जरूरी है अन्यथा हकीक नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है।
जैसे की-ज्योतिषीय मान्यता है कि,सूर्य राहु की युक्ति में लाल हकीक या शनि और मंगल की युति आपकी जन्मकुंडली में किसी भी घर में हो तो, लाल हकीक या मूंगा नहीं पहनना चाहिए। हकीक को लेकर तो और ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है,क्योंकि एक हकीक में ही कई रंगों का मेल या पत्तियां या धारियां होती है।
ये हमारे देश मे सस्ता भी बहुत है और ये ईरान में महंगा भी बहुत है।जब ये हकीक जो ऊपर से बदरंग दिखते है,इन्हें जब मशीनों से घिसकर तराशा जाता है,तब इसमे से जो प्रकार्तिक रूप से बनी दैविक चिन्हों भरी कलाकृतियां निकलती है,उनकी बहुत बड़ी ऊंची कीमत होती है।

हकीक को पहनने की सबसे सरल और विशेष टेस्टिंग ज्ञान:-

वैसे हकीक को आप लाये ओर अपने पास रखे और अच्छे सपने आएं तो पहन लें,बुरे सपने आये तो ये ज्यादा महंगा नहीं है,किसी मन्दिर में चढ़ा आये।
बस यही सबसे बड़ी पहचान है,यो बिन डरे ऐसे ही टेस्ट करके,अपना भाग्य को सफल बनायें।

विशेष लाभ ज्ञान:-
अपने पूजाघर में एक लोटे में जल भरकर नो रंगों के हकीक रखने से पूजाघर में नेगेटिविटी कम हो कर पूजाकरने में मन लगता है।
ओर अपने बेड के नीचे भी एक प्लेट में 9 रंग के हकीक सीधे रखें और उतना ही सादा पानी भरें,की जितना वे आधे डूबे दिखते रहे और रात भर रखा रहने दे,फिर सुबह उनका जल पौधे में डाल दें।ऐसा करते सोने से अनेक प्रकार की शारारिक परेशानी व संकटों से बहुत बड़ी राहत मिलेगी।अनुभव करें।हर दूसरे महीने की पूर्णिमा को सारे हकीकों को मन्दिर में या पीपल पर दूध गंगा जल में डालकर चढ़ा आवैं ओर नए लेकर फिर ऐसा करते रहे,तो सन्तान होने की परेशानी या ऐसी अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
Www.satyasmeemission.org

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Scroll to Top