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बैलोन देवी चालीसा

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टेर
सत्य नारायण शिव ब्रह्मा विष्णु,सत्य से जन्मे ईश महान।
सत्यई काली सरस्वती लक्ष्मी, ॐ ही जननी माँ भगवान।।
सत्य ॐ सर्व द्व और देवी,गणपति बटुक भैरव हनुमान।
सत्य ॐ सर्व मंगला दुर्गा,बैलोन से करती सर्व कल्याण।।
दोहा
पाऊ दर्शन नित्य मैं,रहूँ सदा तेरे पास।
पूर्ण हो मेरी मनोकामना,सर्वमंगला तेरा दास।।
चालीसा
जय जय जय सर्वमंगला माता।
दुःख हरे तू सुख की दाता।।
प्रेम पूर्वक करे जो सेवा।
वह पाता मनवांछित फल मेवा।।
जो जन तेरे दर पे आये।
तुमने उनके दोष भुलाये।।
स्वप्न बलराम जी को आया।
मैया ने आदेश सुनाया।।
खोजो मेरी मूरत सलोनी।
प्रकट भई बैलोन में जननी।।
जब से यहाँ विराजी माता।
बैलोन सिद्ध हुआ जग विख्याता।।
जो यहाँ दर्शन करने आते।
उनके काज सफल हो जाते।।
जो मैया की करे पुकार।
उनका बेडा करती पार।।
जो भी याचक दर पे आता।
मैया से झोली भर पाता।।
माता पुत्र सभी को जाने।
भेद भाव कुछ भी ना माने।।
राजा हो या रंक हो कोई।
सब पर कृपा एक सी होई।।
विवाह संतति में हो देरी।
जा बैलोन लगाये टेरी।।
हो सब पूरी मनोकामना।
ध्यान लगा जो करे साधना।।
ब्रह्म रूप तू ज्ञान स्वरूपा।
सर्वमंगला तू दुर्गा रूपा।।
ऋषि मुनि करते गुणगान।
महिमा गाते वेद पुराण।।
जो मैया के व्रत को धारे।
माँ उसके सब काज सवारें।।
भुत पिशाच जिन्न बेताला।
डाकनी शाकिनी कठिन कराला।।
जब सर्वमंगला नाम सुनाते।
पल भर ठहर नही वो पाते।।
जब आ जाये संकट भारी।
माँ को याद करे नर नारी।।
हैं माता ही परम उदार।
सुन निज जन की करूँण पुकार।।
अपने आँचल में ले लेती।
सारी पीड़ा तुरंत हर लेती।।
जो मंदिर में दीप जलाये।
उसका कारज सफल हो जाये।।
इस माता की छटा निराली।
ये ही दुर्गा ये ही काली।।
जय जगदम्बा जय कल्याणी।
तेरी माया किसने जानी।।
ऋषि मुनि भी सब गए हार।
पाया नहीं किसी ने पार।।
प्रेम मूल मंत्र है तेरा।
प्रेम बिना सब है अधूरा।।
सूरज चंदा गगन प्रकाशे।
सब में माँ की ज्योति भासे।।
जिसने माता को अपनाया।
उसने जग में सब कुछ पाया।।
जिसने माता को बिसराया।
उसने जग में कष्ट उठाया।।
जिस पे ना रोटी रोजगार।
वह मैया के जाये द्धार।।
प्रेम पूर्वक शीश झुकाये।
क्षमा मांग दण्डोत लगाये।।
माँ देवे ऐसा वरदान।
बढ़े रोज यश धन सम्मान।।
शुक्ल पक्ष के अष्टमी मंगल।
ले मिष्ठान और मेवा संग फल।।
माता का जो करे प्रसाद।
उसके मिटें सभी विषाद।।
जो यह पाठ करे चालीसा।
उसकी होती पूरी मनसा।।
सात बार जो करे नित कोई।
उस पर कृपा माता होई।।
देव दनुज सब करते वंदन।
माँ का बार बार अभिनंदन।।
जो भी चूक हमारी होई।
करिये क्षमा मात तुम सोई।।
करे स्वामी सत्येंद्र तेरा गुणगान।
सर्वमंगला रखियों सबका ध्यान।।
दोहा
सर्वमंगला माता का है,बैलोन निवास।
चलो माँ के दर्शन करो,होगी पूरी आस।।
राम कृष्ण सीता राधे,सर्वमंगला दुर्गा को ध्यायै।
चलो बैलोन के मंदिर भक्तों,माँ सर्वमंगला तुम्हें बुलाये।।
बोलो?जय सर्वमंगला माता की जय?

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