Home Satyasmee Mission 30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सत्यास्मि मिशन की शुभकामनाएं?✍

30 मई हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सत्यास्मि मिशन की शुभकामनाएं?✍

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पंडित युगुल किशोर शुक्ल ने प्रथम हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन किया और इसकी प्रकाशन तिथि 30 मई, 1826 ई. को ही हिंदी पत्रकारिता दिवसके रूप में मनाया जाता है।
इतिहास हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई थी, जिसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है।
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अन्य जानकारी अपने लेख हिंदी के दैनिक पत्र में आचार्य शिवपूजन सहाय ने लिखा था कि- लोग दैनिक पत्रों का साहित्यिक महत्व नहीं समझते, बल्कि वे उन्हें राजनीतिक जागरण का साधन मात्र समझते हैं।
हिंदी उदन्त मार्तण्ड ने समाज में चल रहे विरोधाभासों एवं अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध आम जन की आवाज़ को उठाने का कार्य किया था। क़ानूनी कारणों एवं ग्राहकों के पर्याप्त सहयोग न देने के कारण 19 दिसंबर, 1827 को युगल किशोर शुक्ल को उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन बंद करना पड़ा। उदन्त मार्तण्ड के अंतिम अंक में एक नोट प्रकाशित हुआ था जिसमें उसके बंद होने की पीड़ा झलकती है। वह इस प्रकार था-
आज दिवस लौ उग चुक्यों मार्तण्ड उदन्त। अस्ताचल को जाता है दिनकर दिन अब अंत।।
उदन्त मार्तण्ड बंद हो गया, लेकिन उससे पहले वह हिंदी पत्रकारिता का प्रस्थान बिंदु तो बन ही चुका था।
?30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं✍
समाचार सूर्य उदन्त मार्तण्ड
हिंदी प्रथम दैनिक पत्र।
30 मई जन्मदिवस बना
चला 79 मंगलवार दिन के सत्र।।
समाचार पत्र हिंदी के
जीवंत करते हिंदी व्यवहार।
सुधरे हिंदी पढ़ सभी
हिंदी के सभी जगत समाचार।।
आज जो पढ़ पा रहे पत्र
उसका जाता श्रेय महान।
राजा राममोहन राय को
और पंडित युगल किशोर विद्धान।।
अन्य भाषा छायी छपी
भारत देश सभी और।
तब मार्तंड उदन्त ने
हिंदी पत्र से किया हिंद भौर।।
सन् अट्ठाहर सो सत्ताईस में
पीड़ा छापी जन सामान्य।
अग्रेजी शासन विरुद्ध विरोध
हिन्दु भाषा की जग मान्य।।
ब्रज और खड़ी मिश्रित बोली
में लिखे गए नए नए लेख।
जिसे मध्यदेशीय भाषा कहे
उससे चमका हिंदी विद्य लेख।।
मिशनरियों के नित पत्र निकले
उनको मिले सभी डाक सुविधा।
प्रयत्न कर भी नही मिली
और मार्तंड झेले सभी दुविधा।।
बिन सरकारी साहयता के
ये चला नही अधिक दिन।
जन साहयता भी नही मिली
यो सांसे लगा गिन गिन।
पर अंततः वो दिन आ पहुँचा
जब उदंत मार्तंड हो गया बंद।
हिंदी कलम रुक गयी
छिपा पत्र घोर आभाव के अंध।।
पर अस्ताचल को जाते जाते
हिंदी पत्रकारिता बनी पहचान।
प्रस्थान हुआ दे आवाहन हिंद
हिंदी पत्रिकारिता का दे ज्ञान।।
इसी दिवस को आज मनाते
हिंदी पत्रकारिता दिवस संज्ञान।
जय हिंदी उदंत मार्तंड पत्र तुम
आज विभिन्न रूप में छप रहे मान।।

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