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लांगुरिया चालीसा

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?लांगुरिया चालीसा?
दोहा
श्री लांगुरिया तुम्हे नमन,प्रेम का दो आशीष।
धन वर धर्म ज्ञान दो,तुम बेलोन वराधीश।।
नित नित श्रवण मनन करूँ,छवि तुम्हारी रख ध्यान।
प्रभु बाल रूप तुम,मेरा सदा करो कल्याण।।
चालीसा
जय जय जय लांगुरिया देवा।
स्वीकार करो भक्तों की सेवा।।
बाल रूप बेलोन विराजे।
भक्तों के तुम काज को साजे।।
कथा तुम्हारी भक्ति भरी है।
सुनता जो भी कृपा झरी है।।
एक समय की बात तुम्हारी।
शिव गौरा आकाश विचारी।।
विल्व वृक्ष का जंगल देखा।
मनमोहक सुंदर वो अनोखा।।
गौरा थकी विश्राम पधारी।
शिला देख बैठी आधारी।।
शिव गौरा करने लगे ध्यान।
चरण के छूने से हुआ भान।।
देखा एक बालक अति सुंदर।
मात प्रेम ह्रदय हुआ अंदर।।
पुचकार के पूछा कौन हो बालक।
माता तेरा भक्त मैं बालक।।
सुन माता हुयी अति प्रसन्न।
आशीर्वाद दिया पुलिकित हो मन।।
तेज निकल शिला में समाया।
तेज छाया बन सामने आया।।
छाया ने ली आकृति माया।
छाया ने गौरी को ध्याया।।
गौरा ने आशीष दिया वर।
भविष्य में तुम्हीं रहो अमर।।
तुम सभी का मंगल करने वाली।
सर्व मंगला नाम भाग्यशाली।।
और ये बालक लागुंरिया तेरा।
जो भक्तों को वर बांधे सेहरा।।
सेवक मंगला लांगुरिया बाल।
सदा रहे बन माँ की ढाल।।
लांगुर नाम लाल लंगोटे धारी।
यही है अखंड परम् ब्रह्मचारी।।
माँ संग देते सभी वरदान।
करते भक्त सदा कल्याण।।
यही तपस्या की बलराम।
अतुलित बल पाया अविराम।।
अनन्त सिद्ध का यही है धाम।
यहाँ कृपा है कृष्ण और राम।।
गले जनेऊ हाथ गदा है।
चार पगों में धरा पदा है।।
काले मतवाले घूँघर बाल।
तन सिंदूर चन्दन है भाल।।
ऋद्धि सिद्धि मुक्ति के दाता।
जो भक्ति से यहाँ शीश नवाता।।
चैत्र आषाढ़ क्वार नवरात्रि माघ।
जलाये ज्योत खुले बंधन भाग।।
करो प्रेम से जो भी अर्पण।
भक्त रहे ना कभी भी कृपण।।
अथाह ज्ञान के लांगुरिया स्वामी।
भक्त कृपालु भक्ति अनुगामी।।
अष्टमी विशेष लांगुरिया कृपा।
दर्शन मात्र मनचाहा बरपा।।
लांगुर लांगुर नाम पुकारो।
तत्क्षण भक्त भाग्य उद्धारो।।
भूत प्रेत जिन्न बेताल।
लांगुरिया है इनके काल।।
चौकी मूठ कटे इंद्रजाल।
दर्शन आये यहाँ नित साल।।
पार्वती नन्दन गणपति रूप।
तुम्हीं हो दाता संतति भूप।।
सिंदूर नारियल ध्वजा चढ़ाये।
ग्रह अनुकूल मन चाहा पाये।।
जिस घर कलह सदा ही रहती।
धन की कमी सदा बनी रहती।।
मृत्यु होती घर में अकाल।
ऋण अपमान चढ़ता भक्त भाल।।
लिया दिया वापस नही आता।
शिक्षा नोकरी मनचाही ना पाता।।
बारह अष्टमी करो सर्वमंगला व्रत।
लांगुरिया चढ़ाओ सिंदूर मिला घृत।।
और अष्टमी अखंड ज्योत जलाओ।
लौंग बताशे अग्यारी चढ़ाओ।।
आठ बताशे अपने से उतारे।
काले कुत्ते को दो सारे।।
मिटे रोग संकट सब कष्ट।
लांगुरिया माँ संग करे भय नष्ट।।
जो लांगुरिया चालीसा गावे।
चौदह भुवन मोक्ष संग पावे।।
दोहा
ध्यान ज्ञान भक्ति दो,लांगुरिया देव राज।
सदा फले शक्ति मेरी,मेरे सफल सदा हो काज।।
अर्थ धर्म काम मोक्ष दो,और सदा पाऊ तेरे दर्शन।
जय लांगुरिया महाबली,तुम्हें माँ संग देख करूँ हर्षन।।
बोलो?जय जय लांगुरिया महाबली?
 

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