Home Satyasmee Mission सिद्धि मिलनी आसान सम्भलनी कठिन

सिद्धि मिलनी आसान सम्भलनी कठिन

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बहुत पुरानी बात हैं एक बार एक भक्त गुलावठी से आये वे बैंक में सरकारी सर्विस करते थे उन्होंने अपने प्रश्न और उत्तर को मेरे बताने के उपरांत फिर विस्तार से अपनी बात बताई की उनकी पत्नी को किसी तांत्रिक के कारण काली की सिद्धि हुयी जबकि उस तांत्रिक को उतनी सिद्धि नही थी इन शिष्य महिला का उस तांत्रिक के घर उनकी पत्नी से बहुत मेल था तब किसी दिन तांत्रिक की पत्नी ने उनसे प्रश्न किया की मेरे इस बच्चे का भविष्य देख कर बताओ वे महिला भावावेश में आई और बोली ये बच्चा तेरा नही है तू तो इसकी यशोदा मईया है देवकी तो कोई और है ये सुन वो महिला स्तब्द्ध हो गयी की यही सत्य है की ये मेरी सोतन का तांत्रिक की दूसरी पत्नी का ये बच्चा था और ऐसे ही एक घटना ये हुयी की शिष्य महिला के पास कोई परिचित महिला आई उसके जेवर चूर गए थे तो वे उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से बता दिए की तेरी देवरानी के बच्चों ने चुराए है और वे बताये स्थान से प्राप्त भी हुए अब कई ऐसी घटनाओं के चलते वे उसी तांत्रिक के पास गए की ये आपकी शिष्या है आप चाहे जितना पैसा ले इसका कुछ इलाज करें तांत्रिक पहले ही कई बातों को लेकर चिड़ा हुआ था उसने बकरे की भेंट मांगी और तांत्रिक क्रिया की यो उसकी वो साधक शिष्य बीमार होनी प्रारम्भ हुयी घर में समस्या खड़ी हो गयी और वो शक्ति जो महिला पर आती थी वो घर में कभी इस पर कभी उस पर आती विछिप्त हो गयी एक दिन उसी ने उस भक्त महिला पर आकर बताया की ये तेरे तांत्रिक गुरु का ही किया है तुझसे जो बकरे की भेंट तुझे सिद्धि देने को दिलाई थी वो अपने लिए उपयोग की ताकि तेरी सिद्धि और तू भी उसी के वश में होकर उसी के काम में साहयता करे तभी वो तेरे से अपनी तांत्रिक क्रियाओं में सहारा लेता है अब तू उसके कामों में विध्न डालने लगी है यो वो तेरी सिद्धि मुझे तेरे से अलग कर खुली छोड़ रहा है तू इसका उपाय कर नही तो अबका त्यौहार नही देखेगी ये सुन वो महिला और उसका पति बच्चे सब परेशान होकर दूसरे तांत्रिकों पर गए पर किसी से वो उपाय नही हुआ आखिर वो भक्त महिला स्वयं सिद्धि की भेंट चढ़ गयी परंतु अब भी घर में कभी कोई परेशान तो कभी नवेली बहुएँ परेशान उनके संतान होनी आदि गड़बड़ होने लगी और उसी तांत्रिक के पास जाने पर अब उससे भी ये नही सम्भली क्योकि वो पूरा सिद्ध नही था उसका भी कोई गुरु दिल्ली में था वे उस पर गए वो बोला भई ये शक्ति बड़ी भयंकर है हमारी शक्तियों से इसका समाधान नही हो पा रहा है यो वे सभी जगहां निराश होकर हम यहाँ आपका नाम सुनकर आये तब मैं बोला की सिद्धि आनी आसान है उसे सम्भालना कठिन है वहाँ उच्चतर गुरु चाहिए जो निस्वार्थी हो तब मैने उपाय बताया की जितने भी मंत्र तम्हें उस तांत्रिक व औरों ने दिए है उन्हें गंगा जी में एक पंडित को ले जाकर उससे संकल्पित कराते पूर्णिमासी को गंगा में छुड़वाते जाओ तब तुम्हे शांति स्वयं मिल जायेगी क्योकि एक दूसरे की काट करते करते तुम्हारे घर में सब मंत्र शत्रु बने हुए इकट्ठे हो गए है तब तुम्हें कैसे शांति हो यो पहले सभी से मुक्ति पाओ और फिर सामान्य ईश्वर का नाम लेते रहो पर हुआ यूँ की कोई पण्डित इसे करने को तैयार नही हो और साथ ही ये भी इसी को सिद्ध मंत्र बताने को तैयार नही थे तब फिर ये समस्या ले मेरे पास लौटे तब मेने एक एक मंत्र निकलवाए लगभग 22 मन्त्र थे तब उस समय मैं ये सिद्धासिद्ध महामंत्र सत्य ॐ सिद्धायै नमः के यज्ञ कर रहा था ये सब मंत्र उसी में संकल्पित कर समाहित कर यज्ञ किया उस परिवार को ये गुरु मंत्र दे शांति दी ओर उनका समाधान हुआ-स्मरण रखों की शांति का सिद्ध सूत्र भी ये है की विरोध अनुभव ही करना छोड़ दो केवल सकारात्मक पक्ष को अनुभव करो तब स्वयं में केवल और केवल सकारात्मक शक्तियों का ही वास होगा तब आप ईश्वर की उस शक्ति का अनुभव करोगे जो केवल और केवल सकारात्मक है तब सब कुछ नकारात्मक आप में समाहित हो जायेगा जैसे धर्म कथाओं में अवतार अपने शत्रु के सभी अस्त्रों को अपने में समाहित कर शत्रु को अस्त्रविहीन कर देते है क्योकि वे विरोध करना बंद कर देते विरोध उनमें होता ही नही है यो जब भी विरोध करोगे सदा हानि और मृत्यु से घिरे रहोगे यही है यथार्थ “”महामृत्युंजय मंत्र का सत्यार्थ अर्थ और उपाय”” यही मेने किया और उन्हें शांति दी परन्तु इधर एक और अशांति विद्यमान होकर उपस्थित हुयी वो था हमारा एक और शिष्य अंकित गुप्ता उसे बहुत दिनों से इच्छा थी की मुझे काली माँ की सिद्धि हो मैं यज्ञ करता हुआ इन सब मन्त्रों को महामंत्र में समाहित कर था वो दैनिक के तरह आया चरण छू कर बोला स्वामी जी मैं बड़ा व्यथित हूँ तबतक मैं यज्ञ समापन कर चूका था और हॉल में आ बैठा तब इसको ये सिद्धासिद्ध गुरु मंत्र मिला हुआ था पर इसकी बचपन से आंतरिक इच्छा काली माँ की सिद्धि की थी और इसका परिवार बाला जी बहुत जाता था इसकी माता इसके बचपन में ही स्वर्गवासी हो चुकी थी और इसके ऊपर उनका कभी कभी असर आता था तब मेने ये जान की भक्त की इच्छा पूरी करना गुरु कर्तव्य होता है यो इसे बताया की अभी मैने इस पूर्व घटना से अनेक मंत्र निकलवा कर महामंत्र में समाहित कर रहा हूँ तू चाहे तो इनमे से तुझे श्मशान काली का शावर सिद्धि मंत्र- ओम काली महाकाली किलकारी भरे पावे समुंद्र सी प्याली चार वीर भैरो चौरासी तब तो पुजू पान मीठाई तब बोलू काली की दुहाई सत्य नाम आदेश गुरु शब्द साँचा लागे पिंड कांचा सत्य नाम आदेश गुरु का…(यहां दिया मंत्र गुरु वचन से सिद्ध होता है) देता हूँ ये सुन बड़ा प्रसन्न हुआ बोलो मुझे दो मैं बोला अभी कुछ दिन बाद दीपावली है यो मैं तुझे देता हूँ तू इस मंत्र से इतने मेरे पास ही नित्य जप संग यज्ञ करना और छोटी दीपावली से बड़ी की महारात्रि तक अधिक जप यज्ञ ध्यान करना सिद्ध हो जायेगा वैसे ये बकरे की बलि मांगती है पर मैंने इसे शुद्ध कर दिया है बस श्मशान में जाकर वहां के डोम को बकरे का मांस खरीद कर और शराब और दक्षिणा भेंट कर आना यो इसके पास पैसे भी नही थे उसकी भी व्यवस्था की तब इसे पहले मंत्र दिया और शाम को इसने वो सब श्मशान जाकर डोम को भेंट दे आया वहां ये बहुत पहले भी मेरे अनेक भक्तों-अनिल ध्यानी,विपिन मिश्रा.मनजीत.प्रवीण पंडित,मोहित मोनू,अजय आदि के साथ जाकर कई बार ध्यान किया करता था जिससे इनका श्मशान का अनावश्यक डर निकल गया था तब वापस आकर मेरे साथ-मैं अपने महामन्त्र का और ये काली का दीपावली तक नियमित मंत्र जप यज्ञ किया करता था तब छोटी दीपावली पर ये घर पर खूब खेला बक्कारा की मैं काली हूँ मैं इसकी माता हूँ आदि आदि इस पर शक्ति झीली नही इसकी देह टूट गयी यानि बुरी तरहां थक गयी यहाँ एक रहस्य और बताता हूँ की जो भक्त पूर्वजन्म में स्त्री प्रधान मंत्र जपते रहे है उनमें चन्द्र स्वर यानि इंगला नाड़ी या चन्द्र शक्ति की प्रधानता अधिक हो जाती है यो वे प्रकर्ति में से स्त्री शक्ति का आकर्षण शीघ्र कर लेते है उन्हेँ देवी और उनसे सम्बंधित सुक्ष्म शरीर पाए साधक या साधिका इनके शरीर का आसरा ले कर सिद्धि व् दर्शन और भावावेश देते है ठीक ऐसे ही जो साधक पुरुष मंत्र का सन्धान करते है उनमे पुरुष शक्ति शीघ्र आकर्षित होती है जिसे हम इस पर किसी देवी या देव या पितरों का आवेश आना बोलते है ऐसे पूवजन्म के साधक वर्तमान जीवन में अनजाने इन भावो से ग्रस्त रहते है यो इन पर जब भी पूर्वजन्म के शुभ अशुभ वरदान या शाप का वर्तमान प्रभाव होता है तो इन्हें इस प्रकार की देव देवी उपदेवों की छोटी या बड़ी सिद्धि या दर्शन हो जाते है भाग्य अच्छा है तो ये वर्तमान तप जप और सिद्ध गुरु के संरक्षण में सिद्धि को पूर्ण कर लेते है अन्यथा हानि शोषण उठाते है ठीक यही यहाँ अंकित के साथ हुआ ये वेसे भी निम्न कालसर्प दोष से पीड़ित था यो इसके भाग्य में कृपाओं का मिलना बिछुड़ना ही लिखा है यो इसको इसके बाद मेने इसे गुलावठी पैसे देकर भेजा वहाँ ये उस तांत्रिक से मिला उसके यहाँ अनेक देवी देवता पीरों की मजार सी बनी थी वो लोगों को इन्हें दिखा उपाय करता था उसने इससे बात की और इसने वो काली का मंत्र बताया की।मुझे ये कहीं से मिला है चूँकि मेने इसे यहां का पता बताने को मना कर दिया था की इसे वो फिर बताता नही और उसने वही सब उतार बाजी के पट्टे पढ़ाये ये वहाँ कई बार गया और छल प्रपंच ही सीख आया पर आकर सब छोड़ अपना काली का मंत्र जपता ये अपने रोजगार में लग गया काम ठीक चलने लगा तभी इसके प्रारब्ध ने जोर मारा मेरा ही एक पूर्व निकासित भक्त विनोद जो स्वामी विश्ववांतेश्वर नाम से सिद्धबली हनुमान जी की गद्दी लगता था एक दिन मैं बोला की अंकित मुझे आज ऐसा दिखा की विनोद यहाँ आकर माफ़ी मांग रहा है ये तुरन्त बोला अजी स्वामी जी ये बहुत जल्दी माफ़ी को घुटने टेकेगा मैं बोला क्यों? ये बोला मुझे भी लगा तब मैंने विचार किया अवश्य इसने शक्ति चलाई है ये बहुत दिनों से कह रहा था की गुरु जी ये मुझे देख घमंड में घूरता सा है किसी दिन कुछ होगा जरूर और वही सब हुआ घटना उपरांत विनोद ने आकर क्षमा माँगी मैने समझा कर क्षमा किया पर उसका रवैया व्ही रहा चूँकि दोनों शनि मन्दिर के पुराने पुजारी और सेवक व् विद्या के जानकर थे विनोद से अंकित शनिदेव का पुराना सेवक था यही से विवाद चला और भी बातें है यो उसकी और इसकी अहंकार की लड़ाई ठन गयी एक दूसरे की कि मैं भी सिद्ध हूँ ये लोगों से कहा उन्होंने इन दोनों से आपस में बढ़ा चढ़ा कर कहा यो बात बढ़ गयी देखें कौन सिद्ध है? और उसने इस पर हनुमान जी का तंत्र प्रयोग किया और इसने मेरे से पूछे बिना अपने श्मशान काली के मंत्र का उपयोग श्मशान में जाकर उस पर कर दिया अब इस लड़ाई और अन्यों पर भी शक्ति उपयोग करने से दोनों की अल्प सिद्धि शक्ति क्षीण होकर एक दूसरे को हानि पहुँचा दी वो भी अपनी नवजात बच्ची की मृत्यु और अपनी पत्नी से मारपीट की और अपने पास आने वाले एक भक्त के साथ शोषण केस में क़ानूनी कार्यवाही में फंस मानहानि उठा बेठा और आज भी इन्ही अनेक अन्य अनजाने कर्मो से मानहानि उठा रहा है उसकी कथा अन्य लेख में विस्तार से कहूँगा और ये भी सिद्धि से हाथ धो बैठा और अपने मुश्किल से बसे घर ग्रहस्थ में शांति कर पाया और ये चूँकि यहाँ जुड़ा था यो बच गया और क्षमा मांग कर पुनः नवीन प्रकार से जप ध्यान करता हुआ अपना दैनिक व्यवसाय के साथ अपनी स्वतंत्र नई सर्व देव देवी की संकट निवारण गद्दी को लगाने लगा कर जीवन यापन कर रहा है। अंकित ने सदा आश्रम और शनि मन्दिर की और मेरी बड़ी सेवा की अब अपने रूचि के कार्य में व्यस्त है बड़ा अच्छा सेवक भक्त है।और विनोद भी अच्छा भक्त है सब पूर्व प्रारब्ध पाते है दिन भी उतना ही अच्छा है ओर रात्री भी।
इस कथा से ये ज्ञान मिलता है की अनगिनत भक्त सिद्धि की लालसाओं में फंसे तांत्रिको के पास भटकते हुए ऐसे ही धन तन और जाने कितने प्रकार की पीड़ा उठाते है जिसका निदान फिर असम्भव हो जाता है यो केवल सहज ही गुरु मंत्र का विधिवत जप ध्यान करने पर स्वयमेव ही अशुभ कर्मों का नाश होते होते शुभकर्मों के विकास होने से शुभ भाग्य की प्राप्ति समयानुसार होकर भविष्य सुखमय व्यतीत होता है यो सामान्य तौरपर केवल किसी भी मन्दिर की झाड़ू पोंछा सेवा अवश्य करो और वहीं बैठ का ईश्वर का ध्यान करो और प्रार्थना करो की शुभकर्म बढ़े और सदगुरू की प्राप्त होकर कल्याण हो।
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