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सभी पूर्णिमाँ की संतान है

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जो भी जन्मा पूर्णिमाँ
वो पूर्णिमा की संतान।
चौथ अष्टमी नवी एकादशी
सभी पूर्णिमाँ पुत्र भगवान।।
सत्यनारायण अवतार सब
ब्रह्मा विष्णु शिव।
पूर्णिमा इन सबकी माता है
तभी जन्में मात अमृत पीव।।
सरस्वती लक्ष्मी पार्वती
ये पूर्णिमा भूमि अवतार।
सीता राधा नारी सब
पूर्णिमाँ सौलह कला सदेह सार।।
सत्य पुरुष ॐ पूर्णिमाँ नारी
सिद्धायै रूप सृष्टि सर्व जीव।
नमः प्रेमरत सत्य ॐ पूर्णिमाँ
चैत्र पूर्णिमाँ दिव्य प्रेम दिवस अतीव।।
वैशाख पूर्णिमा सृष्टि निर्माण
प्रस्फुटित नव् यौवन नर नार।
ब्रह्मचर्य शिक्षाकाल वैशाख
भोग योग धर्म ज्ञान आधार।।
ज्येष्ठ पूर्णिमाँ ब्रह्म पुत्र अवतरण
यो ब्रह्म प्रथम जग देव।
सरस्वती जन्म भी ज्येष्ठ है
यो ब्रह्म ज्ञान ज्येष्ठ स्वमेव।।
आषाढ़ पूर्णिमाँ विष्णु जन्म
जन्म लक्ष्मी मंथन सागर क्षीर।
ब्रह्म ज्ञान क्रिया संग धारण
ग्रहस्थ धर्म पालन जगधीर।।
श्रावण पूर्णिमाँ शिव जन्म
पार्वती जन्म पूर्णिमाँ हिमराज।
श्रवण मनन चार वेद जग धर्म
नर नार पालन करे प्रेम के काज।।
भाद्रपद पूर्णिमाँ जन्म काल पुरुष
पृथ्वी जन्म काल समय प्रकाश।
दस महाविद्या अवतरित जन्म
दीक्षित नर नारी जग महारास ।।
अश्वनी पूर्णिमाँ जन्म गति
और जन्म सप्त रंग राग।
भाषा वर्ण समुदाय जन्म
नर नर सप्त ग्रह भाग।।
कार्तिक पूर्णिमाँ कन्यादान जन्म
जन्म समस्त विवाह संस्कार।
सुख प्रसन्नता अष्ट एश्वर्य जन्म
नर नार प्राप्त ईश आनन्द उपहार।
मार्गशीष पूर्णिमाँ दत्तात्रेय जन्म
और जन्म गुरु सभी पंथ।
इंगला पिंगला सुषम्ना जन्म
ईं कुंडलिनी नर नार सहस्त्र हंत।।
पौष पूर्णिमाँ सम्पूर्णता जन्म
जन्म जगत जीव सम्पूर्ण।
स्वयं अंतिम लक्ष्य है मोक्ष
जीवन मरण चक्र सम्पूर्ण।
माघ पूर्णिमाँ जन्म दान
पँचत्त्व निर्मित तन धन भान।
इसे त्याग नर नार सब
प्रकर्ति परे वानप्रस्थ आत्मनुसंधान।।
फाल्गुन पूर्णिमाँ बसंत जन्म
पुनरावर्ती एकोहम् बहुश्याम।
प्रस्फुटित होता फट् ईश चतुर्थ धर्म
विस्त्रित स्वाहा प्रेम अविराम।।
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